Love Messages in Hindi

The only word to discribe you is MINE. and the only word to discribe us is FOREVER.

यूँ तो तमन्नाएं दिल में ना थी हमें लेकिन; ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक़ बन बैठे; बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन; ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।

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यूँ तो तमन्नाएं दिल में ना थी हमें लेकिन; ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक़ बन बैठे; बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन; ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।

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यूँ तो तमन्नाएं दिल में ना थी हमें लेकिन; ना जाने तुझे देखकर क्यों आशिक़ बन बैठे; बंदगी तो खुदा की भी करते थे लेकिन; ना जाने क्यों हम काफ़िर बन बैठे।

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तुम बिन ज़िंदगी सूनी सी लगती है; हर पल अधूरी सी लगती है; अब तो इन साँसों को अपनी साँसों से जोड़ दे; क्योंकि अब यह ज़िंदगी कुछ पल की मेहमान सी लगती है।

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तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे; खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे; अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो; तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।

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संगमरमर के महल में तेरी ही तस्वीर सजाऊंगा; मेरे इस दिल में ऐ प्यार तेरे ही ख्वाब सजाऊंगा; यूँ एक बार आजमा के देख तेरे दिल में बस जाऊंगा; मैं तो प्यार का हूँ प्यासा जो तेरे आगोश में मर जाऊॅंगा

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तपिश से बच के घटाओं में बैठ जाते हैं; गए हुए कि सदाओं में बैठ जाते हैं; हम इर्द-गिर्द के मौसम से घबरायें; तेरे ख्यालों की छाओं में बैठ जाते हैं।

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इश्क़ का शुक्रिया कुछ इस तरह अदा करूँ; आप भूल भी जाओ तो मैं हर पल याद करूँ; इस इश्क़ ने बस इतना सिखाया है मुझे; कि खुद से पहले आपके लिए दुआ करूँ।

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मुझे भी अब नींद की तलब नहीं; अब रातों को जागना अच्छा लगता है; पता नहीं वो मेरी तकदीर में है कि नहीं; पर उसे खुदा से माँगना अच्छा लगता है।

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आरज़ू वस्ल की रखती है परेशाँ क्या क्या; क्या बताऊँ कि मिरे दिल में हैं अरमाँ क्या क्या; ग़म अज़ीज़ों का हसीनों की जुदाई देखी; देखें दिखलाए अभी गर्दिश-ए-दौराँ क्या क्या।

सपनों की दुनिया में हम खोते चले गए; मदहोश न थे पर मदहोश होते चले गए; ना जाने क्या बात थी उस चेहरे में; ना चाहते हुए भी उसके होते चले गए।

मैंने अपनी हर एक सांस तुम्हारी गुलाम कर रखी है; लोगो में ये ज़िन्दगी बदनाम कर रखी है; अब ये आइना भी किस काम का मेरे; मैंने तो अपनी परछाई भी तुम्हारे नाम कर रखी है।

आँखें मुझे तलवे से मलने नहीं देते; अरमान मेरे दिल के निकलने नहीं देते; खातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते; सच है कि हमीं दिल को संभलने नहीं दते; किसी नाज़ से कहते हैं झुंझला के शब-ए-वस्ल; तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते।

कोई तीर जैसे जिगर के पार हुआ है; जाने क्यों दिल इतना बेक़रार हुआ है; पहले कभी देखा न मैंने तुम्हें; फिर भी क्यों ऐ अजनबी इस कदर तुमसे प्यार हुआ है।

तेरी आवाज़ की शहनाइयों से प्यार करते हैं; तस्सवुर मैं तेरे तन्हाइयों से प्यार करते हैं; जो मेरे नाम से तेरे नाम को जोड़े ज़माने वाले; उन चर्चों से अब हम प्यार करते हैं।